Friday, February 23
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कौन हैं बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेन्द्र शास्त्री, जानें बागेश्वर धाम का इतिहास…….

Desk : धीरेन्द्र शास्त्री पुजारी या ढोंगी!! इनके जीवन से जुडा हर तथ्य हम बताएंगे. दरअसल मध्यप्रदेश के बागेश्वर धाम सरकार पंडित यानी की धीरेन्द्र शास्त्री आजकल चर्चा का विषय बने हुए हैं. यह चर्चा नागपुर से शुरू हुई जब पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया गया. अंध श्रद्धा निर्मूलन समिती नें बागेश्वर धाम सरकार को चमत्कार साबित करने के लिए चुनौती की तो वह कथा को बीच में ही छोड़कर चले गए.

इसके बाद पंडित धीरेन्द्र शास्त्री का भी एक बयान सामने आया जिसमें उन्होंने चुनौती देने वालों को रायपुर बुलाया, जहां उनकी राम कथा चल रही थी. इसके बाद शुक्रवार को धीरेंद्र शास्त्री ने मीडिया कर्मियों के सामने आकर चमत्कार करने का दावा किया. जिसके बाद से धीरेंद्र शास्त्री न्यूज़ चैनल्स की सुर्खियों में हैं.

तो चलिए अब हम आपको बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री के साथ-साथ इनके विवाद के बारे में भी विस्तार से बताते हैं.

धीरेन्द्र शास्त्री कथा के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने और उसका समाधान करने का दावा किया करते हैं ऐसा कहा जाता है कि भूत प्रेत से लेकर बीमारी तक का इलाज बाबा की कथाओं हो जाता है. बाबा के समर्थक ऐसा दावा करते हैं कि बागेश्वर धाम सरकार इंसान को देखते ही उसकी हर तरह की परेशानी जान लेते हैंऔर उसका समाधान भी करते हैं. वहीं बागेश्वर धाम सरकार का कहना है कि वह लोगों की अर्जियां बालाजी हनुमान तक पहुंचाने का एक जरिया है. जिन्हें भगवान सुनकर समाधान कर देते हैं. इन्हीं दावों को नागपुर की श्रद्धा निर्मूलन समिति ने चुनौती दी यहीं से इस विवाद की शुरुआत हुई.

आइए हम आपको अब बागेश्वर धाम के इतिहास के बारे में थोड़ा बताते हैं.

छतरपुर के पास एक जगह है गढ़ा यहीं पर बागेश्वर धाम स्थित है. यहां बालाजी हनुमान का मंदिर भी है. हर मंगलवार को बालाजी हनुमान के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ती हैं. धीरे-धीरे सब लोग इसे बागेश्वर धाम सरकार के नाम से जाननें लगे. यह मंदिर 7 साल पुराना बताया जाता है. 1986 में इस मंदिर का रिनोवेशन कराया गया था. 1987 के आसपास यहां एक संत बाबा जी सेतु लाल जी महाराज आए थे. इनको भगवान दास जी महाराज के नाम से लोग जाना करते थे. धाम के मौजूदा प्रमुख पंडित, धीरेन्द्र शास्त्री भगवान दास जी महाराज के पौत्र हैं. इसके बाद 1989 के समय बाबा जी द्वारा बागेश्वर धाम में एक विशाल महायज्ञ आयोजित किया गया. 2012 में बागेश्वर धाम की सिद्ध पीठ पर श्रद्धालुओं की समस्याओं के निवारण के लिए दरबार का शुभारंभ किया गया. इसके बाद धीरे-धीरे बागेश्वर धाम के भक्त इस दरबार से जुड़ने लगे. ऐसा दावा होता है कि आने वाले लोगों की समस्याओं का निवारण हो जाता है.

अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर धीरेंद्र शास्त्री कौन है.

दरअसल बागेश्वर धाम की बागडोर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पास में ही है. पंडित धीरेंद्र का जन्म 1996 में छतरपुर यानी कि मध्य प्रदेश के जिले गड़ागंज गांव में हुआ था. उनका पूरा परिवार अभी भी गड़ागंज में ही स्थित है. पंडित शास्त्री के दादा पंडित भगवान दास गर्ग भी इस मंदिर में पुजारी हुआ करते थे. ऐसा कहा जाता है कि पंडित धीरेंद्र का बचपन काफी कठिनाइयों में बीता है जब वह छोटे थे तो परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनको एक वक्त का भोजन भी नहीं मिल पाता था. पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पिता का नाम रामकृपाल गर्ग और मां का नाम सरोज गर्ग हैं. धीरेन्द्र के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग जी महाराज है. वह भी बालाजी बागेश्वर धाम में रहते हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने 11 साल की उम्र से ही बालाजी बागेश्वर धाम में पूजा पाठ करना शुरू कर दिया था. पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के दादा ने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से शिक्षा प्राप्त की थी इसके बाद वह गड़ागंज पहुंच गए थे.

अक्सर आपने ऐसा देखा होगा कि बागेश्वर धाम प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री हमेशा एक छोटी सी गदा लेकर चलते हैं. तो आपके मन में यह सवाल उठता होगा कि आखिर वह गधा लेकर क्यों चलते हैं. इसको लेकर धीरेन्द्र शास्त्री का कहना है कि इससे उन्हें हनुमानजी की शक्तियां मिलती रहती है. वह हनुमान जी की आराधना करने के लिए लोग को भी प्रेरित किया करते हैं. पंडित धीरेन्द्र शास्त्री कहते हैं कि वह किसी तरह का कोई चमत्कार नहीं करते हैं. वह तो सिर्फ बालाजी हनुमान जी के सामने लोगों की अर्जियाँ लगा देते हैं. जिसे बालाजी स्वीकार कर लेते हैं. इससे आम लोगों को फायदा भी होता है. अंधविश्वास का विवाद सामने आने के बाद भी पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने अपनी सफाई पेश की है उन्होंने कहा कि वह अपने दरबार में किसी को भुलाते नहीं है लोग खुद आते हैं. वह तो सिर्फ लोगों की अर्जियों को भगवान के सामने रखते हैं. बाकी सब कुछ भगवान की ओर से होता है.

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