Wednesday, February 28
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नालंदा में भू-माफियाओं ने एक हजार के स्टांप पेपर पर बेच दिये नदी, तालाब और पहाड़

नालंदा जिले में धड़ल्ले से सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री हो रही है. मैदानी जमीन तो छोड़िये, भूमाफियाओं ने पहाड़, नदी और तालाब तक बेच डाले. शहर के हिरण्य पर्वत पर जागो रविदास ने दो लाख रुपये में दो रूम का घर खरीदा है. जागो की तरह ही करीब चार सौ लोग हैं, जो पहाड़ पर बने घर में रह रहे हैं. पहाड़ होने के कारण इस जमीन का सरकारी स्तर पर निबंधन नहीं हो सकता है.

भूमाफियाओं ने ऐसे निकाला तोड़

भूमाफियाओं ने इसका तोड़ निकाला. बेचने और खरीदनेवालों ने एक हजार रुपये के स्टम्प पेपर पर पंचनामा बनवा लिया है. हिरण्य पर्वत पर रहनेवालेलोगों से से 20 से 25 ने तो जमीन का निबंधन करा लिया है. जिनकी जमीन का निबंधन नहीं हो सका, उन्होंने पांच-पांच गवाहों वाले स्टंप पेपर पर अवैध कब्जा वाली जमीन खरीद ली. जिले में कई वर्षों से अवैध रूप से नदी, पोखर, तालाब पर कब्जे का खेल चल रहा है. इसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई नहीं होती. इन सरकारी जमीनों पर बने अवैध मकानों पर में लोग नगर निगम से बिजली, पानी, सड़क और होल्डिंग की सुविधा भी ले रहे हैं.

अधिकारी से लेकर अंचल कर्मी तक निलंबित

यही हाल जिले के एकंगसराय, इस्लामपुर, राजगीर व अन्य क्षेत्रों में भी है. इन शहरों में जिन लोगों ने सरकारी जमीन का निबंधन करा लिया है, उसे रद्द कराने के लिए प्रशासन कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. वर्षों पहले राजगीर में रेलवे की 45.55 एकड़ जमीन 20 लोगों ने अपने नाम करा लिया था. इस मामले में अधिकारी से लेकर अंचल कर्मी तक निलंबित हो चुके हैं.

200 फुट की पंचाने हो गयी 20 फुट की

जमीन माफियाओं की करतूत का ही नतीजा है कि बिहारशरीफ के बगल सेनिकलने वाली पंचाने नदी अब नाले का रूप ले चुकी है. कभी यह नदी 200 फुट चौड़ी हुआ करती थी, अब इसकी चौड़ाई घट कर करीब 20 फुट रह गयी है. नदी में तेजी से अतिक्रमण हो रहा है. इसकी जमीन एक लाख से तीन लाख रुपये प्रति डिसमिल बेची जा रही है. इस अवैध कारोबार में अंचल कार्यालय का बहुत बड़ा रोल है. जमीन की अवैध खरीद बिक्री मामले में अब तक कई अंचलाधिकारी फंस चुके है.

जलीय क्षेत्रों से चार सप्ताह में अतिक्रमण को हटा कर बताए

इधर, बिहार के जलीय क्षेत्रों की जमीन पर किये गये अवैध अतिक्रमण पर सुनवाई करते हुए पटना हाइकोर्ट ने पटना और मगध प्रमंडल के अंचल अधिकारियों को अगली सुनवाई में तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रामपुनीत चौधरी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. कोर्ट ने तिरहुत, दरभंगा और मुंगेर प्रमंडलों के सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने अपने क्षेत्रों के जलीय क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण को हटा कर चार सप्ताह में कोर्ट को हलफनामा दायर कर बताएं.

वर्षा के जल को भी रोकने का मार्ग खत्म

कोर्ट को याचिकाकर्ता ने बताया कि पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में पहले बड़ी संख्या में जलीय क्षेत्र थे, जिसका उपयोग कृषि कार्य, पेयजल व अन्य कार्यों के लिए होता था. अब अधिकतर जलीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा हो गया है . अतिक्रमणकारियों द्वारा उन्हें पाट कर उस भूमि पर अवैध तरीके से कई प्रकार के निर्माण किये गये हैं. इससे जहां पेय और कृषि कार्य के लिए जल की उपलब्धता कम हुई है, वहीं वर्षा के जल को भी रोकने का मार्ग खत्म हो गया है.

क्या कहते हैं अधिकारी

ऐसी जमीन पर हक नहीं. नदी की भूमि खरीद-बिक्री की जानकारी मुझे नहीं है. बिजली, पानी और नगर निगम से होल्डिंग नंबर जारी होने से सरकारी जमीन पर किसी का हक नहीं बन जाता है.

– शशांक शुभंकर, जिला पदाधिकारी

कोर्ट में चल रही है सुनवाई 15 से 20 सरकारी जमीनों का गलत ढंग से निबंधन कराने का मामला सामने आया है. उनके निबंधन को रद्द कराने के लिए कोर्ट में सुनवाई चल रही है. स्टंप पेपर पर जमीन की खरीद-बिक्री कानूनी रूप से सही नहीं है. नदी, पोखर, तालाब, पहाड़ की भूमि पर कोई कब्जा नहीं कर सकता है.

मंजीत कुमार, एडीएम, नालंदा

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