Tuesday, June 18
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जिस ‘गांजे’ को लेकर बॉलीवुड में मचा है बवाल, उसी से होगा Covid-19 के गंभीर मरीजों का इलाज

नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड मामले की जांच के दौरान ड्रग एंगल सामने आने के बाद जिस गांजे और चरस को लेकर बॉलीवुड में बवाल मचा हुआ है। अब खबर आ रही है कि उसी गांजे से कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीजों का इलाज किया जाएगा। दरअसल एक स्टडी में इस बात का दावा किया गया है कि गांजे की मदद से कोरोना के गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। अमेरिका की साउथ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने चूहों के ऊपर गांजे की तीन स्टडी की है। अमेरिकी रिसर्च में ये पाया गया कि गांजे में मौजूद टीएचसी (Tetrahydrocannabinol) पदार्थ से कोरोना मरीजों का इलाज हो सकता है।

गांजे का ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की योजना बना रहे वैज्ञानिक:

असल में THC लोगों को खतरनाक इम्यून रेस्पॉन्स से बचा सकता है जिसकी वजह से अक्सर मरीज एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) के शिकार हो जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के गंभीर मरीजों में ARDS की समस्या काफी आम है। इसी वजह से कई मरीजों की मौत भी हो जाती है। वहीं, अमेरिकी स्टडी में सबसे पहले ये पता लगाने की कोशिश की गई थी कि क्या THC इम्यून रेस्पॉन्स को रोक सकता है। यूनिवर्सिटी की तीनों स्टडी में कई दर्जन प्रयोग किए गए।

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पहले चूहों को एक टॉक्सिन दिया गया और इसके बाद THC दिया गया। देखा गया कि जिन चूहों को THC दिया गया, उनकी जान बच गई, लेकिन उन चूहों की मौत हो गई जिन्हें सिर्फ टॉक्सिन दिया गया था। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है और वैज्ञानिकों ने कहा है कि वे लोगों को खुद से गांजे के सेवन के लिए प्रोत्साहित नहीं कर रहे। ऐसा करने पर लोगों की बीमारी बढ़ भी सकती है। रिसर्चर्स अब गांजे का ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

अमेरिका में लीगल है गांजा; भारत में भी हटेगा बैन!

बता दें कि अमेरिका के कुछ राज्यों में गांजे का सेवन कानूनी रूप से वैध है। वहीं, भारत में बीजेपी नेता और सांसद मेनका गांधी ने भी पैरवी की है कि मनोवैज्ञानिक विकारों को ठीक करने के लिए मरीजुआना (गांजे) पर लगे प्रतिबंध के फैसले में आंशिक बदलाव लाया जाए। ऐसे दुनिया के बहुत से देशों ने किया है। इसके अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्‍यक्षता वाले ग्रुप ऑफ मिनिस्‍टर्स ने पहले इस बारे में एक ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की है। ऐसे में माना जा रहा है कि भविष्य में भारत सरकार भी इस पर लगा बैन हटा सकती है।

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