Thursday, February 29
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पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे पर भारी परे उनके ही हवलदार, सिंबल लेकर दी पटखनी

डीजीपी पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेकर राजनीति में आने वाले 1987 बैच के आइपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय पर उनके ही महकमे में 15 साल पूर्व सिपाही की नौकरी करने वाले परशुराम चतुर्वेदी भारी पड़ गये। बक्सर मुफस्सिल थाने के महदा गांव के रहने वाले परशुराम चतुर्वेदी ने 15 साल पूर्व ही अपनी नौकरी छोड़ दी थी। चतुर्वेदी ने भाजपा किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रहकर इलाके में अपनी पहचान बनायी है. प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रहे।

दूसरी ओर अपने सेवा काल से पांच महीने पूर्व 22 सितंबर को वीआरएस लेने वाले गुप्तेश्वर पांडेय के बक्सर या शाहपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनने के कयास लग रहे थे। पहले ऐसा लग रहा था कि इन दोनों सीटों में से कोई एक जदयू के खाते में जायेगी। लेकिन, भाजपा हर हाल में अपनी इन पारंपरिक सीटों को छोड़ने को राजी नहीं हुई।

एक बार ऐसा लगा कि गुप्तेश्वर पांडेय को अब भाजपा की सदस्यता स्वीकार करनी होगी. लेकिन, भाजपा ने नामांकन की अंतिम तिथि के एक दिन पूर्व बक्सर की सीट से अपने तपे-तपाये कार्यकर्ता परशुराम चतुर्वेदी को उम्मीदवार घोषित कर दिया।

वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी पूर्व डीजीपी के उम्मीदवार होने की चर्चा थी, पर बुधवार को जदयू ने वहां से पूर्व सांसद वैद्यनाथ महतो के बेटे सुनील कुमार को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। खास यह कि उनके साथ काम करने वाले डीजी पद से रिटायर हुए उनकी ही 1987 बैच के आइपीएस अधिकारी सुनील कुमार को जदयू ने भोरे सुरक्षित सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया।

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