Wednesday, February 28
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सुशील मोदी के सामने उम्मीदवार नहीं उतारने पर RJD की सफाई, कहा- कभी नहीं था इरादा

पटना. पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के निधन से खाली हुई सीट पर बिहार में होने वाले राज्य सभा उपचुनाव में नामांकन के अंतिम तारीख बीत जाने के बावजूद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने कोई उम्मीदवार नहीं किया. अब इस पूरे मामले को लेकर बिहार में सियासत फिर से गरमा गई है. वैसे पार्टी के नेता कह रहे हैं कि वह इस उपचुनाव में भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) के खिलाफ अपना उम्मीदवार खड़ा ही नहीं करना चाहती थी, यह तो सत्ताधारी गठबंधन द्वारा फैलाया गया झूठ था, क्योंकि उसे इस बात का डर था.

राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने न्यूज़ 18 से कहा कि राज्यसभा में उपचुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने को लेकर राजद का पहले से भी कोई इरादा नहीं था. इसके पीछे वजह यह है कि राजद पहले से मानती रही है कि यह सीट रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई है. लिहाजा इस पर सबसे अधिक अगर किसी की दावेदारी बनती है तो वह लोजपा की है.

पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि राजद चाहता था इस सीट पर रामविलास पासवान की पत्नी रीना पासवान एनडीए के उम्मीदवार हो और विपक्ष में होने के बावजूद महागठबंधन उनको समर्थन देकर एक स्वस्थ लोकतंत्र की परंपरा का निर्वहन करता. लेकिन, भाजपा ने ऐसा नहीं होने दिया और यह सीट उसने अपने खाते में रखी.

शक्ति सिंह यादव ने कहा कि राजद द्वारा राज्यसभा सीट के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा करने को लेकर आधिकारिक तौर पर कभी कोई बात नहीं कही गई. एनडीए के लोगों द्वारा इस मामले को लेकर कई तरह के कयास भले ही लगाए जा रहे थे, लेकिन राजद ने जो गहन मंथन किया था वह केवल और केवल रीना पासवान को समर्थन देने तक ही सीमित था.
उधर भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय जनता दल की इस सफाई पर तंज कसते हुए कहा है कि हार सामने देखकर राजद ने अपने हाथ पीछे खींच लिए. प्रदेश प्रवक्ता संजय टाइगर की मानें तो जिस तरीके से बिहार विधानसभा अध्यक्ष के लिए जिद पर अड़े महागठबंधन ने अपनी फजीहत करवाई वैसे मैं महागठबंधन बड़ा घटक दल राजद इतनी जल्दी फिर से अपने किरकिरी नहीं होने देना चाहता था. लिहाजा उसने उम्मीदवार ही नहीं खड़ा किया.

गौरतलब है कि इस सीट के लिए राजद नेता श्याम रजक को राजद प्रत्याशी के तौर पर उतारने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन सूत्र बताते हैं कि हार के डर की वजह से उन्होंने इसके लिए सहमति नहीं दी. बहरहाल अब इस सीट पर पूर्व उपमुख्यमंत्री व भाजपा के सीनियर नेता सुशील कुमार मोदी का निर्विरोध चुना जाना तय है और इस बात की प्रबल संभावना है कि सुशील मोदी केंद्र में मंत्री बनाए जा सकते हैं.

बता दें कि  एक निर्दलीय श्याम नंदन प्रसाद ने अपना नामांकन दाखिल किया है, लेकिन वे 10 विधायकों के समर्थन वाला पत्र नहीं सौंप पाए हैं. मिली जानकारी के अनुसार वे चुनाव आयोग में यह पत्र आज सौंपेंगे. ऐसे में सवाल यह है कि जब नामांकन की तारीख खत्म हो चुकी है तो चुनाव आयोग इजाजत देगा?

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