Sunday, April 14
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रामविलास ने की थी पहली पत्नी से बेवफाई, आज फूट-फूट कर रो रहीं हैं राजकुमारी |

बिहार की दलित राजनीति के दिग्गज सितारे रामविलास पासवान का जाना बिहार की राजनीति के एक युग के अंत जैसा है। यही अंत है रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी के इंतजार का। राजकुमारी 40 साल से खगड़िया के अलौली के सरवनी गांव में इंतजार में अकेली बैठी थी। इंतजार था रामविलास पासवान से मिलने की, जिसकी उम्मीद साल दर साल कम होती जा रही थी, लेकिन 2015 में जब रामविलास पासवान अपने पिता की बरसी में गांव आएं तो आमना-सामना हुआ।

कोई बात तो नहीं हुई, लेकिन राजकुमारी देवी ने रामविलास पासवान के पांव छूये। बस यही एक याद है जो आज भी राजकुमारी के पास है। वह इस पल को याद करती हैं और बेजार रोने लगती हैं। रोते-रोते बेहोश होती हैं तो लोग होश में लाते हैं फिर रोती और फिर बेहोश हो जाती हैं। राजकुमारी की शादी महज 13 साल की उम्र में रामविलास पासवान से हुई थी। रामविलास उस समय 14 साल के थे। शादी के बाद कई साल तक दोनों गांव में रहे फिर पटना आये।

राजकुमारी ने कभी नहीं की शिकायत

1967 में एमएलए बनने के बाद राजकुमारी देवी, रामविलास पासवान के साथ आर ब्लॉक स्थित एमएलए फ्लैट में रहीं। फिर रामविलास पासवान एमपी बन गए। सालों तक सबकुछ ठीक रहा, लेकिन फिर सब बदल गया। उनकी बेटी आशा पासवान बताती हैं कि याद नहीं पापा हमसे कब अलग हुए, लेकिन मैं शायद तब 7 साल की थी।


40 साल से राजकुमारी अकेली इंतजार करती रहीं। रामविलास पासवान सत्ता के शीर्ष पर बैठे रहें, लेकिन राजकुमारी ने कभी उनके खिलाफ कुछ नहीं कहा। कई बार मीडिया ने भी उनसे ये सवाल किए, लेकिन फिर भी वह चुप रहीं। ऐसा नहीं है कि उनकी इस चुप्पी के पीछे नाराजगी थी, बल्कि राजकुमारी ने रामविलास की खुशी को अपनी खुशी मान ली थी।

राजनीति ने किया था राजकुमारी को रामविलास से अलग

ये जानते हुए भी अगर रामविलास सत्ता के शीर्ष पर ना होते तो शायद उनके साथ होते, राजकुमारी ने कभी उनके राजनेता बनने पर दुख नहीं जताया था। राजकुमारी कहती है कि किसी सरकारी नौकरी में होते तो इतनी पहचान थोड़े ही बनती। उन्हें देश और विदेशों तक लोग जानते हैं। रामविलास लंबे समय से बीमार थे। यह जानने पर उन्हें चिंता तो होती थी, लेकिन कभी उनके पास जाने की जिद नहीं की। राजकुमारी देवी आज भी अपने पैतृक आवास में अकेली रहती हैं। बीमार होने पर पटना तो आती हैं, लेकिन कभी 2 महीने से ज्यादा बेटी-दामाद के पास नहीं रहतीं। कहती हैं बेटी-दामाद के घर कितने दिन रहूंगी। यहां रहूंगी तो मेरे घर को कौन देखेगा।

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