Wednesday, May 29
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बिहार के हज यात्रियों को गया नहीं, कोलकाता से भरनी होगी उड़ान, हज कोटा घटकर हो सकता कम

कोरोना महामारी के दौरान पड़ने वाले त्यौहार को लेकर आए दिन बादलाव हो रहा है। आनेवाले नए साल 2021 में होने वाली हज यात्रा में कई बदलाव किए गए है। पहले जहां देशभर में 21 स्थानों से हज यात्री उड़ान भरते थे, उसे घटाकर अब उड़ान की संख्‍या 10 कर दिया गया है। गया की जगह कोलकाता से बिहार के हज यात्रियों को उड़ान भरनी होगी।

बता दे कि हज यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गया है। 10 दिसंबर तक यह प्रक्रिया चलेगी। कोविड 19 को लेकर इस बार देशभर में इम्बारकेशन प्वाइंट की संख्या घटाकर 10 कर दी गई है। पहले 21 इम्बारकेशन प्वाइंट से फ्लाइट थी। इम्बारकेशन प्वाइंट की सूची में से गया को हटा दिया गया है। अब बिहार के हज यात्रियों को कोलकाता से उड़ान भरनी होगी। इम्बारकेशन प्वाइंट बदलने से बिहार के हज यात्रियों की जेब पर 50 हजार रुपए से अधिक का भार पड़ेगा। बिहार राज्य हज कमेटी के CEO राशिद हुसैन ने बताया कि गया से उड़ान भरने पर पहले कम खर्च आता था। कोलकाता से उड़ान भरने पर बिहार के हज यात्रियों को फूडिंग-लॉजिंग में 50 हजार से भी ज्यादा का खर्च आना मुमकिन है। उन्होंने बताया कि पहले पूरे देशभर का डेढ़ लाख कोटा था। कोरोना के मद्देनजर अब 50 हजार हो गया है। बिहार की बात करें तो यहां का कोटा 12 हजार था। इस बार मुमकिन है कि 3500 के करीब हो जाए। 

पहले मक्का में ठहरने के लिए दो कैटेगरी होती थी। ग्रीन और अजीजिया कैटेगरी। इसबार सिर्फ अजीजिया कैटेगरी होगी। यह व्यवस्था भीड़ कम करने के लिए की गई है। ग्रीन कैटेगरी में आवेदन करने वाले हज यात्री खानाकाबा के नजदीक ठहरते है। वहीं अजीजिया कैटेगरी वाले दूर ठहरते है। ग्रीन कैटेगरी में ठहराव में लग्जरी व्यवस्था होती है। वहीं अजीजिया में अपेक्षाकृत कम होती है। ग्रीन कैटेगरी में अजीजिया की अपेक्षा खर्च बढ़ जाता है।

इस बार कोरोना संक्रमण के मद्देनजर रखते हुए उम्र की बंदिश भी रहेगी। बच्चे और बुजर्गों में कोरोना संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। 18 साल से नीचे और 65 से ऊपर के बुजुर्ग हज के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। 

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